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Medieval India — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

History · UPSC CSE
प्रश्न: चोल साम्राज्य की प्रशासनिक नवाचार — ग्राम स्वशासन, राजकोषीय नीति और नौसैनिक विस्तार

प्रस्तावना

चोल साम्राज्य (9वीं–13वीं शताब्दी ई.) दक्षिण भारतीय राजनीति का उत्कर्ष-बिंदु है, जिसमें परिष्कृत स्थानीय स्वशासन, राजस्व प्रशासन और हिंद महासागर में समुद्री शक्ति-प्रक्षेपण का सुसंगत समन्वय दृष्टिगोचर होता है।

मुख्य बिंदु

1. ग्राम स्वशासन: Uttaramerur का प्रतिमान

Tamil Nadu के Uttaramerur अभिलेखों में एक सुव्यवस्थित ग्राम सभा (Sabha) का विवरण मिलता है, जिसमें 'variyams' नामक वार्ड समितियाँ, सदस्यों हेतु भूमि-स्वामित्व, आयु एवं नैतिक आचरण जैसी स्पष्ट पात्रता शर्तें तथा ताड़पत्र पर्चियों (kudavolai) द्वारा लॉटरी-आधारित चयन प्रक्रिया थी। यह प्रमाणित करता है कि चोल शासन में सहभागी स्थानीय प्रशासन संस्थागत रूप से स्थापित था।

2. राजकोषीय नीति और Kulottunga I की उपाधि

Kulottunga I ने साम्राज्य भर में पारगमन शुल्क समाप्त कर 'sungam thavirtta cholan' (शुल्क-उन्मूलक चोल) की प्रतिष्ठित उपाधि अर्जित की। इस उपाय ने आंतरिक व्यापार को सुगम बनाया, वस्तु-आवागमन की बाधाएँ घटाईं और व्यापारी समुदायों में राजनीतिक सद्भाव सुदृढ़ किया — जो परिपक्व साम्राज्यिक प्रशासन की राजस्व-वैधता अदला-बदली को प्रतिबिंबित करता है।

3. नौसैनिक अभियान: विस्तार और सीमाएँ

Rajendra Chola I का उत्तर भारत अभियान गंगाजल संग्रह हेतु गांगेय मैदानों तक पहुँचा, किंतु यह एक स्थल-अभियान था, नौसैनिक नहीं। उनके नौसैनिक अभियान दक्षिण-पूर्व एशियाई राज्यों — विशेषतः Srivijaya साम्राज्य — के विरुद्ध थे, जिससे Bay of Bengal में चोल वाणिज्यिक एवं राजनीतिक प्रभाव विस्तृत हुआ। दोनों को एकाकार करना चोल शक्ति-प्रक्षेपण के भौगोलिक तर्क को विकृत करता है।

4. प्रशासनिक सुसंगति: शासन की विरासत

चोल राज्य ने केंद्रीकृत राजकीय सत्ता और विकेंद्रीकृत स्थानीय संस्थाओं के मध्य संतुलन स्थापित किया। Brahmadeya बस्तियाँ और व्यापारी श्रेणियाँ राजकीय नौकरशाही के समानांतर कार्यरत थीं, जिससे बहुस्तरीय शासन-व्यवस्था निर्मित हुई जो केवल बलप्रयोग पर निर्भर हुए बिना शताब्दियों तक साम्राज्यिक एकता बनाए रखने में सक्षम रही।

निष्कर्ष

चोल विरासत यह स्थापित करती है कि दीर्घजीवी साम्राज्य स्थानीय स्वशासन को केंद्रीय सत्ता से एकीकृत करते हैं, राजकोषीय नीति को व्यापार-सुविधा से संरेखित करते हैं और सैन्य शक्ति का प्रयोग स्पष्ट भौगोलिक रणनीति के साथ करते हैं — ये सिद्धांत समकालीन संघीय शासन के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

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