Gandhi Peace Prize की स्थापना 1995 में महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के अवसर पर की गई थी। यह भारत का प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार है, जो अहिंसक माध्यमों से सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिवर्तन में योगदान को मान्यता देता है।
यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है तथा इसका निर्णय एक निर्णायक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। अन्य सदस्यों में भारत के मुख्य न्यायाधीश, Lok Sabha में विपक्ष के नेता तथा प्रधानमंत्री द्वारा नामित दो著名 विशिष्ट व्यक्ति सम्मिलित होते हैं। यह बहु-संस्थागत संरचना चयन प्रक्रिया को दल-निरपेक्ष वैधता एवं न्यायिक विश्वसनीयता प्रदान करती है।
यह पुरस्कार किसी भी देश के व्यक्तियों, संस्थाओं एवं संगठनों के लिए खुला है, जो इसके सार्वभौमिक स्वरूप को दर्शाता है। इसके अंतर्गत एक करोड़ रुपये की नकद राशि, एक प्रशस्ति-पत्र एवं एक फलक प्रदान किया जाता है। व्यापक पात्रता मानदंड विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अहिंसक सामाजिक परिवर्तन के विविध स्वरूपों को मान्यता देने में सहायक है।
विदेशी नागरिकों एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को यह पुरस्कार प्रदान कर भारत गांधीवादी मूल्यों को संघर्ष-समाधान एवं विकास के सार्वभौमिक ढाँचे के रूप में प्रस्तुत करता है। मानवीय कार्यों में संलग्न अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों एवं संगठनों को पुरस्कृत किए जाने से बहुपक्षीय मंचों पर भारत की शांति-समर्थक सभ्यतागत छवि सुदृढ़ होती है।
पुरस्कार प्रदान करने में आवधिक अंतराल तथा सार्वजनिक रूप से प्रलेखित, नियम-आधारित चयन समय-सारणी के अभाव ने प्रक्रियागत पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। एक निश्चित वार्षिक चक्र को संस्थागत रूप देने एवं चयन मानदंडों को प्रकाशित करने से पुरस्कार की विश्वसनीयता एवं वैश्विक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
Gandhi Peace Prize शासन-दर्शन के रूप में अहिंसा के प्रति भारत की मानक प्रतिबद्धता को मूर्त रूप देता है। इसकी प्रक्रियागत नियमितता एवं अंतर्राष्ट्रीय पहुँच को सुदृढ़ करने से यह भारत की मूल्य-आधारित विदेश नीति के एक विश्वसनीय उपकरण के रूप में और अधिक प्रभावी बनेगा।
GS Answer Coach आपके उत्तर को Introduction, Body, Conclusion के आधार पर परखता है — 30 सेकंड में।
Essay Coach · GS Answer Coach · Cutoff Planner · 500+ Mains PYQs — साइन अप मुफ्त।