Constitution (One Hundred and Sixth Amendment) Act, 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, भारत के विधायी निकायों में महिलाओं के दीर्घकालिक अल्प-प्रतिनिधित्व को दूर करने हेतु एक संरचनात्मक हस्तक्षेप है।
यह अधिनियम Lok Sabha, राज्य विधानसभाओं तथा Delhi Legislative Assembly में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। यह आरक्षण Scheduled Castes और Scheduled Tribes के लिए पहले से आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है, जिससे SC और ST महिलाओं को उन आरक्षणों के भीतर उप-कोटे का लाभ मिलता है। सीटों का आवंटन प्रत्येक परिसीमन के पश्चात् आवर्तित किया जाएगा।
इस अधिनियम की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा; यह अगली जनगणना के पश्चात् नए परिसीमन की समाप्ति पर निर्भर है। इससे कार्यान्वयन 18वीं Lok Sabha से आगे स्थगित हो जाता है, अतः यह दावा कि प्रावधान 18वीं Lok Sabha से प्रारंभ होंगे, तथ्यतः असंगत है।
अधिनियम में प्रारंभ तिथि से 15 वर्षों का Sunset Clause निहित है, जिसके पश्चात् संसद द्वारा पुनः विधान न किए जाने पर यह आरक्षण समाप्त हो जाएगा। यह समयबद्ध प्रकृति नीति-ढाँचे में एक साथ तात्कालिकता और अनिश्चितता दोनों उत्पन्न करती है।
आरक्षण की सक्रियता को परिसीमन से जोड़ना — जो स्वयं अभी तक न हुई जनगणना पर निर्भर है — प्रशासनिक अस्पष्टता उत्पन्न करता है। आलोचकों का मत है कि यह संरचना विधायी आशय को कमज़ोर करती है, जबकि समर्थक तर्क देते हैं कि परिसीमन आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों का न्यायसंगत भौगोलिक वितरण सुनिश्चित करता है।
इस अधिनियम की रूपांतरकारी क्षमता वास्तविक है, किंतु स्थगित है। समयबद्ध जनगणना और परिसीमन अब महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण की पूर्व-शर्त बन चुके हैं, जिससे प्रशासनिक दक्षता और संवैधानिक वचन परस्पर अविभाज्य हो गए हैं।
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