परिसीमन आयोग एक सांविधिक निकाय है, जो निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का आवधिक पुनर्निर्धारण करता है। इसकी स्वतंत्रता और आदेशों की अंतिमता लोकतांत्रिक निष्पक्षता तथा संघीय संतुलन के लिए अनिवार्य है।
परिसीमन आयोग की स्थापना संसद द्वारा Delimitation Commission Act के अंतर्गत की जाती है। संविधान प्रत्येक जनगणना के पश्चात निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्समायोजन का आदेश देता है। आयोग की संरचना में सामान्यतः उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और Election Commission of India सम्मिलित होते हैं।
आयोग के आदेश विधि के समान बाध्यकारी होते हैं और इन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती देने से स्पष्टतः प्रतिबंधित किया गया है। यह न्यायिक वर्जना दीर्घकालिक वाद-विवाद से निर्वाचन कार्यक्रम को सुरक्षित रखने तथा आयोग की कार्यात्मक स्वायत्तता बनाए रखने हेतु अंतर्निहित है।
आदेशों को Lok Sabha और संबंधित राज्य विधानसभाओं के समक्ष रखा जाता है, परंतु इन सदनों द्वारा कोई संशोधन नहीं किया जा सकता। यह प्रक्रिया केवल सूचनात्मक है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया में विधायी हस्तक्षेप को वर्जित करती है।
परिसीमन Scheduled Castes और Scheduled Tribes के लिए आरक्षित सीटों की संख्या निर्धारित करता है, जो राजनीतिक समावेशन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या पर दीर्घकालिक रोक जैसी स्थितियों में जनसंख्या वृद्धि और प्रतिनिधित्व के बीच गंभीर असंतुलन उत्पन्न होता है।
परिसीमन में अंतिमता और जवाबदेही के मध्य संतुलन स्थापित करना केंद्रीय चुनौती है। आदेश अंतिम होने से पूर्व परामर्श प्रक्रिया को सुदृढ़ करने से आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता से समझौता किए बिना वैधता में वृद्धि संभव है।
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