1947 के पश्चात भारत का भाषायी एवं प्रशासनिक पुनर्गठन एक गतिशील संवैधानिक प्रक्रिया रही है, जिसने अधिनियमों, संशोधनों और क्षेत्रीय पुनर्वर्गीकरण के माध्यम से संघीय पहचान को आकार दिया है।
States Reorganisation Act, 1956 ने भाषायी आधार पर भारत के आंतरिक मानचित्र को मौलिक रूप से पुनर्निर्धारित किया तथा Part A, B एवं C राज्यों के भेद को समाप्त किया। Article 3 के अंतर्गत संसद को नए राज्य बनाने, सीमाएँ परिवर्तित करने या नाम बदलने का अनन्य अधिकार है — इसके लिए सामान्य बहुमत पर्याप्त है, संवैधानिक संशोधन आवश्यक नहीं।
Nagaland का निर्माण State of Nagaland Act, 1962 के माध्यम से Article 3 के अंतर्गत एक सामान्य संसदीय विधान द्वारा हुआ, न कि किसी संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा। यह प्रशासनिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि Article 3, Article 368 की संशोधन प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना राज्य-निर्माण की शक्ति प्रदान करता है।
Tripura प्रारंभ में Part C राज्य था, 1956 के पुनर्गठन के अंतर्गत केंद्रशासित प्रदेश बना और 1972 में Manipur तथा Meghalaya के साथ पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त किया। यह क्रम दर्शाता है कि जनजातीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों को किस प्रकार क्रमशः मुख्यधारा के संघीय ढाँचे में समाहित किया गया।
Arunachal Pradesh की राजधानी Itanagar का नाम Ita Fort से लिया गया है, जहाँ 'Ita' का अर्थ ईंट होता है। इस राज्य में दो National Parks — Namdapha और Mouling — स्थित हैं, जो पूर्वी हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध जैव-विविधता और संरक्षण महत्त्व को प्रतिबिंबित करते हैं।
राज्य-दर्जे के संक्रमणों का सटीक ज्ञान — सामान्य विधान और संवैधानिक संशोधन के मध्य अंतर सहित — संघीय संबंधों, जनजातीय शासन और सीमावर्ती क्षेत्र विकास नीतियों के प्रबंधन हेतु प्रशासकों के लिए अनिवार्य है।
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