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International Organisations / UN Peacekeeping Missions — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Polity · UPSC CSE
प्रश्न: संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन — महत्त्व, परिचालन चुनौतियाँ और भारत का योगदान

प्रस्तावना

UN Peacekeeping Missions संघर्ष क्षेत्रों को स्थिर करने, नागरिकों की सुरक्षा और संघर्षोत्तर शासन को सक्षम बनाने का अंतरराष्ट्रीय सामूहिक साधन है — शीत युद्ध के पश्चात् इसकी जटिलता निरंतर बढ़ी है।

मुख्य बिंदु

1. अधिदेश और परिचालन क्षेत्र

प्रत्येक मिशन को UN Charter के Chapter VI या VII के अंतर्गत UN Security Council द्वारा प्राधिकृत किया जाता है, जिसके अधिदेश युद्धविराम निगरानी से लेकर राज्य-निर्माण तक विस्तृत हैं। UNMIL (लाइबेरिया), MINUSTAH (हैती) और UNMISET (तिमोर-लेस्ते) क्रमशः गृहयुद्ध पुनर्प्राप्ति, भूकंपोत्तर स्थिरीकरण तथा स्वतंत्रतोत्तर संस्था-निर्माण की विविधता को दर्शाते हैं। MINURCAT ने दारफुर संघर्ष के चाड और मध्य अफ्रीकी गणराज्य में विस्तार को संबोधित किया।

2. शासन और जवाबदेही संबंधी चुनौतियाँ

शांति अभियानों में संलग्नता के अस्पष्ट नियम, मेज़बान देश की सहमति की बाधाएँ और संसाधन की कमी जैसी स्थायी चुनौतियाँ विद्यमान हैं। कई मिशनों में यौन शोषण के प्रकरणों के पश्चात् UN ने शून्य-सहिष्णुता नीति अपनाई तथा आचरण एवं अनुशासन ढाँचे को सुदृढ़ किया। Department of Peace Operations और सैन्य-योगदानकर्ता देशों के मध्य समन्वय एक संरचनात्मक अवरोध बना हुआ है।

3. भारत का रणनीतिक योगदान

भारत निरंतर UN Peacekeeping में सर्वाधिक सैन्य-योगदानकर्ता देशों में रहा है और अफ्रीका, एशिया तथा मध्य-पूर्व में कार्मिकों की तैनाती करता है। यह योगदान भारत की बहुपक्षीय साख को सुदृढ़ करता है, सैन्य अंतर-संचालनीयता विकसित करता है और स्थायी Security Council सदस्यता के दावे को बल देता है। भारतीय इंजीनियरिंग एवं चिकित्सा इकाइयों को मेज़बान देशों में क्षमता-निर्माण हेतु विशेष मान्यता प्राप्त हुई है।

4. परिवर्तन और निकास रणनीतियाँ

मिशन समापन के लिए स्थायी शांति की स्थितियाँ, कार्यात्मक राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाएँ और राजनीतिक सुलह आवश्यक हैं। कुछ अफ्रीकी मिशनों में समयपूर्व सैन्य वापसी से पुनः अस्थिरता उत्पन्न हुई, जो यह रेखांकित करती है कि परिवर्तन निश्चित समय-सीमाओं के बजाय निर्धारित मानदंडों से संबद्ध होने चाहिए।

निष्कर्ष

UN Peacekeeping अपरिहार्य किंतु अपूर्ण है — इसकी वैधता निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर आधारित है। त्वरित तैनाती क्षमता, जवाबदेही तंत्र और मिशनोत्तर शांति-निर्माण समर्थन को सुदृढ़ करना ही इन मिशनों की दीर्घकालिक सफलता निर्धारित करेगा।

शब्द गणना: 302

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