संविधान का Article 108 संसद के दोनों सदनों के मध्य गतिरोध निवारण का तंत्र प्रदान करता है, किंतु Lok Sabha और Rajya Sabha की पृथक संवैधानिक भूमिकाओं को संरक्षित रखने हेतु इसका कार्यक्षेत्र सुविचारित रूप से सीमित रखा गया है।
संयुक्त बैठक तब बुलाई जा सकती है जब कोई विधेयक दूसरे सदन द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाए, दोनों सदन संशोधनों पर असहमत हों, अथवा दूसरे सदन द्वारा विधेयक पारित किए बिना छह माह से अधिक समय व्यतीत हो जाए। राष्ट्रपति, मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर संयुक्त बैठक आहूत करते हैं और Lok Sabha के अध्यक्ष इसकी अध्यक्षता करते हैं।
Money Bills को संयुक्त बैठक के तंत्र से स्पष्टतः बाहर रखा गया है। चूँकि Money Bill केवल Lok Sabha में प्रस्तुत किया जा सकता है और Rajya Sabha की भूमिका चौदह दिनों के भीतर सिफारिशें करने तक सीमित है, अतः Article 108 की परिधि में आने वाला संवैधानिक गतिरोध उत्पन्न ही नहीं होता। इस प्रकार किसी Money Bill को संयुक्त बैठक में भेजना संवैधानिक दृष्टि से अनुज्ञेय नहीं है।
संयुक्त बैठक के लिए गणपूर्ति दोनों सदनों की कुल सदस्यता के दसवें भाग के बराबर निर्धारित है, जो प्रत्येक सदन पर लागू गणपूर्ति नियमों के अनुरूप है। निर्णय उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से लिए जाते हैं, जो संरचनात्मक रूप से Lok Sabha को उसकी अधिक संख्या-बल के कारण अनुकूल स्थिति में रखता है।
स्वतंत्रता के पश्चात् संयुक्त बैठकें केवल गिनी-चुनी बार आयोजित हुई हैं, जो इनके असाधारण स्वरूप को रेखांकित करती हैं। यह तंत्र द्विसदनीय विमर्श और सामान्य विधायन में विधायी अवरोध की रोकथाम के मध्य संतुलन स्थापित करता है।
Article 108 एक सुसंतुलित संवैधानिक उपकरण है — सामान्य विधेयकों पर वास्तविक अंतर-सदनीय गतिरोध को सुलझाने हेतु पर्याप्त व्यापक, किंतु वित्तीय विधान में Lok Sabha की प्रधानता बनाए रखने के लिए वित्त विधेयकों से सुविचारित रूप से पृथक।
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