भारत के असंगठित कार्यबल — जिसमें पथ विक्रेता, निर्माण श्रमिक और घरेलू कामगार सम्मिलित हैं — को ऐतिहासिक रूप से औपचारिक पेंशन सुरक्षा से वंचित रखा गया है। PM-SYM एक अंशदायी, सरकार-समतुल्य पेंशन संरचना के माध्यम से इस संरचनात्मक अंतराल को सीधे संबोधित करती है।
PM-SYM उन असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लक्षित करती है जिनकी मासिक आय एक निर्धारित सीमा से कम है। प्रवेश आयु-सीमा 18 से 40 वर्ष है, न कि 21 से 40, जिससे युवा अनौपचारिक श्रमिकों को भी योजना का लाभ सुलभ होता है। नामांकन Common Service Centres के माध्यम से सुगम बनाया गया है, जिससे प्रशासनिक बाधाएँ न्यूनतम होती हैं।
अंशदान की राशि प्रवेश आयु के अनुसार निर्धारित होती है — कम आयु में नामांकित अभिदाता कम मासिक प्रीमियम देते हैं, जबकि 40 वर्ष के निकट नामांकित अभिदाताओं का अंशदान अधिक होता है। केंद्र सरकार प्रत्येक अभिदाता के अंशदान के बराबर राशि एक-से-एक अनुपात में देती है, जिससे अल्प-आय श्रमिकों पर वित्तीय भार कम होता है।
60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर प्रत्येक अभिदाता को न्यूनतम ₹3,000 प्रति माह की आश्वासित पेंशन प्राप्त होती है। यह उन श्रमिकों के लिए एक अनुमानित आय-आधार प्रदान करती है जिनके पास अन्यथा सेवानिवृत्ति बचत का कोई तंत्र उपलब्ध नहीं होता।
अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में, जीवनसाथी को पेंशन का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में प्राप्त करने का अधिकार है। यह लाभ केवल जीवनसाथी तक सीमित है — यह अविवाहित पुत्रियों अथवा अन्य आश्रितों तक विस्तारित नहीं होता, जिससे प्रश्न का कथन 4 असत्य सिद्ध होता है।
PM-SYM भारत के विशाल अनौपचारिक कार्यबल के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक सार्थक कदम है। निरंतर जागरूकता अभियान, सरलीकृत नामांकन प्रक्रिया और समय-समय पर अंशदान पुनरीक्षण यह निर्धारित करेंगे कि योजना अपेक्षित स्तर पर व्यापक कवरेज प्राप्त कर सकती है या नहीं।
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