Certiorari की रिट उच्चतर न्यायालयों को अधीनस्थ न्यायालयों, अधिकरणों या अर्ध-न्यायिक निकायों के निर्णयों को रद्द करने का अधिकार देती है। यह पर्यवेक्षी अधिकारिता और क्षेत्राधिकार-अतिक्रमण से संरक्षण का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
Certiorari, Article 32 के अंतर्गत Supreme Court द्वारा तथा Article 226 के अंतर्गत High Courts द्वारा जारी की जाती है। यह उन न्यायिक या अर्ध-न्यायिक निकायों के विरुद्ध जारी होती है जो क्षेत्राधिकार के बिना कार्य करते हैं, उसका अतिक्रमण करते हैं, या अभिलेख पर स्पष्ट विधि-त्रुटि करते हैं। यह अपीलीय पुनरावलोकन नहीं है, बल्कि क्षेत्राधिकार-संबंधी एवं विधिक त्रुटियों का सुधार करती है।
न्यायालय Certiorari को क्षेत्राधिकार के अभाव, क्षेत्राधिकार के अतिक्रमण, नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन अथवा विधि की स्पष्ट त्रुटि के आधार पर जारी करते हैं। यह रिट विशुद्ध प्रशासनिक या विधायी कार्यों के विरुद्ध उपलब्ध नहीं होती, जो इसे Mandamus जैसी व्यापक रिटों से पृथक् करती है।
Prohibition किसी अधीनस्थ न्यायालय को क्षेत्राधिकार से परे कार्यवाही जारी रखने से रोकती है, जबकि Certiorari पहले से पारित आदेश को रद्द करती है। ये दोनों रिटें अधीनस्थ न्यायनिर्णायक निकायों पर पर्यवेक्षी नियंत्रण के परस्पर पूरक साधन हैं।
Certiorari नागरिकों को सांविधिक अधिकरणों, विनियामक निकायों और प्रशासनिक न्यायनिर्णायकों के मनमाने या ultra vires निर्णयों से सुरक्षा प्रदान करती है। Article 226 के अंतर्गत मूल अधिकारों के उल्लंघन के बिना भी इसकी उपलब्धता High Courts की परिधि को Supreme Court से व्यापक बनाती है, जिससे विकेंद्रीकृत न्यायिक निगरानी सुदृढ़ होती है।
Certiorari न्यायिक पदानुक्रम और जवाबदेही के मध्य संतुलन स्थापित करती है तथा यह सुनिश्चित करती है कि अधीनस्थ न्यायिक मंच विधिसम्मत सीमाओं के भीतर रहें। अधिकरणों की अधिकारिता के विस्तार के साथ समुचित पर्यवेक्षी तंत्र न हो, तो विधि के शासन की रक्षा में यह रिट और भी अपरिहार्य हो जाती है।
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